होरी
तरका -तरका गप्प कहै छी , हिम्मत बहुत जूटौने छी ,
बड़-बड़ माल पचिसी देख क अप्पन नैन पिजौने छि .
कैमप्स में छि फेल सब्जेक्ट्ली, नम्बर बहुत नपौने छि ,
२ ४ - २ ६ , २ ८ -३ ० , ३ २ धरी पहुचौने छि ,
हे , कहियो-कहियो भीड़-भाड़ में, मौध में आंगुर डूबौने छि .
गाम प एकही टा भौजी, सदिखन सटर खासौने छथि ,
कखनो-कखनो हुलकी मारैथ, मुस्की गाल दबौने छथि .
सासु हमर छथी बहुत दरेग्गर , नितहु घी पियौने छथि ,
चारी टैम जाई हम नदी , चोटकल गाल सुखौने छी .
गुढ़ बात सासुर के सुनियौ, सरहोज बैश नुकौने छथि ,
सार क छनि उमेर कनी कच्चा, चुसना ठोढ़ दबौने छथि .
सारि के छनी पातर साड़ी, ढोढी सँ बित्ता खासौने छथि,
चाबस कही हुनक बुधीयारी लोक क हिया जुडौने छथि .
चार हमर टिकल हुनके प, कानियाँ क चरण दबौने छि ,
चारी कोस दूर गाम हमर अछि, तै थुथुना अलगौने छि .
----------------------------------- ब्रज मोहन झा

bahut nik
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